यीशु  मसीह — एकमात्र उद्धारकर्ता

September 4, 2026

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यीशु  मसीह — एकमात्र उद्धारकर्ता:-

सृष्टि, पुराने नियम और नए नियम के आधार पर एक तार्किक बाइबिलीय प्रमाण

मुख्य सत्य

बाइबल एक ही परमेश्वर, एक पतित मानवजाति, एक मूल समस्या—पाप—और एकमात्र अंतिम उद्धारकर्ता—यीशु मसीह—को प्रस्तुत करती है।

पुराना नियम धीरे-धीरे आने वाले उद्धारकर्ता की ओर संकेत करता है, और नया नियम स्पष्ट रूप से उस उद्धारकर्ता की पहचान यीशु मसीह के रूप में करता है।

  1. सृष्टि: इस तर्क का आधार:-

परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है

बाइबल का आरंभ इस महान सत्य से होता है:

“आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।”
— उत्पत्ति 1:1

सृष्टि यह स्थापित करती है कि सब कुछ का मूल स्रोत एक ही परमेश्वर है।

यशायाह कहता है:

“मैं ही यहोवा हूँ, और दूसरा कोई नहीं; मुझे छोड़ कोई परमेश्वर नहीं।”
— यशायाह 45:5

और:

“मैं ही यहोवा हूँ जो सब कुछ का रचनेवाला हूँ… मैं ही ने पृथ्वी को फैलाया।”
— यशायाह 44:24

नए नियम में इसकी पूर्ति

यूहन्ना यीशु को अनादि वचन के रूप में प्रस्तुत करता है:

“आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।”
— यूहन्ना 1:1

फिर लिखा है:

“सब कुछ उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।” — यूहन्ना 1:3

पौलुस कहता है:

“क्योंकि उसी में सारी वस्तुएँ सृजी गईं… चाहे सिंहासन हों, चाहे प्रभुत्व, चाहे प्रधानताएँ, चाहे अधिकारी; सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।” — कुलुस्सियों 1:16

तार्किक निष्कर्ष

पुराना नियम कहता है कि परमेश्वर ने अकेले सृष्टि की।

नया नियम कहता है कि सारी सृष्टि मसीह के द्वारा हुई।

इसलिए मसीह केवल एक सृष्ट प्राणी या अन्य धार्मिक शिक्षक नहीं हैं। वे सृष्टिकर्ता और सृष्टि के बीच के अंतर में सृष्टिकर्ता के पक्ष में हैं।

  1. मनुष्य परमेश्वर के लिए बनाया गया था:-

उत्पत्ति बताती है कि मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया:

“तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप में परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया।” — उत्पत्ति 1:27

मनुष्य का मूल उद्देश्य परमेश्वर के साथ संगति रखना और उसकी आज्ञा मानना था।

लेकिन फिर मानव इतिहास में सबसे बड़ी त्रासदी घटित हुई।

  1. पतन ने उद्धारकर्ता की आवश्यकता उत्पन्न की :-

परमेश्वर ने आदम को चेतावनी दी:

“जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”
— उत्पत्ति 2:17

उत्पत्ति अध्याय 3 में आदम और हव्वा की अवज्ञा का वर्णन है।

पाप के कारण लज्जा, परमेश्वर से अलगाव, दुःख और मृत्यु संसार में आए।

नया नियम इसकी व्याख्या करता है:

“एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई।” — रोमियों 5:12

इसलिए मानवजाति की मूल समस्या पाप है।

पौलुस कहता है:  “सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।”
— रोमियों 3:23

  1. पतन के बाद परमेश्वर ने स्वयं उद्धारकर्ता की प्रतिज्ञा की

उत्पत्ति 3:15 में परमेश्वर ने सर्प से कहा:-  “मैं तेरे और इस स्त्री के बीच, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच बैर उत्पन्न करूंगा; वह तेरे सिर को कुचल देगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।”

मसीही समझ के अनुसार यह सुसमाचार की पहली महान प्रतिज्ञाओं में से एक है। इसे प्रोटो–इवैंजेलियम अर्थात् “पहला सुसमाचार” कहा जाता है।

यहाँ एक आने वाले स्त्री के वंश की बात है जो अंततः सर्प को पराजित करेगा।

नए नियम में पूर्ति

पौलुस कहता है: – “शान्ति का परमेश्वर शैतान को तुम्हारे पाँवों से शीघ्र कुचलवा देगा।” — रोमियों 16:20

इब्रानियों कहता है:- “ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर सामर्थ्य मिली थी, अर्थात् शैतान को नष्ट कर दे।” — इब्रानियों 2:14

तार्किक क्रम

उत्पत्ति 3: सर्प की पराजय की प्रतिज्ञा।
क्रूस: शैतान की शक्ति पर निर्णायक विजय।
पुनरुत्थान: मसीह ने मृत्यु पर विजय पाई।

इसलिए यीशु उस प्रतिज्ञात विजेता के रूप में प्रकट होते हैं जो सर्प को पराजित करता है।

  1. परमेश्वर ने पाप के लिए ढकने का प्रबंध किया:-

आदम और हव्वा के पाप करने के बाद परमेश्वर ने उनके लिए वस्त्र बनाए:

“और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के वस्त्र बनाकर उनको पहना दिए।” — उत्पत्ति 3:21

यहाँ बाइबल में पाप की नग्नता को ढकने का विचार सामने आता है।

बाद में यही विचार बलिदान और प्रायश्चित की व्यवस्था में विकसित होता है।

  1. पुराने नियम की बलिदान व्यवस्था मसीह की ओर संकेत करती है:-

लैव्यव्यवस्था में प्रायश्चित और रक्त के संबंध को स्पष्ट किया गया है:-  “क्योंकि शरीर का प्राण लोहू में रहता है… क्योंकि प्राण के कारण लोहू ही से प्रायश्चित होता है।” — लैव्यव्यवस्था 17:11

लेकिन पुराने नियम के पशु-बलिदान अंतिम समाधान नहीं थे।

इब्रानियों स्पष्ट करता है:- “क्योंकि अनहोना है कि बैलों और बकरों का लोहू पापों को दूर करे।” — इब्रानियों 10:4

वे किसी बड़ी और पूर्ण वास्तविकता की ओर संकेत कर रहे थे।

यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु को देखकर कहा:- “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है जो जगत के पाप उठा ले जाता है!” — यूहन्ना 1:29

पतरस कहता है:- “तुम चाँदी–सोने जैसी नाशमान वस्तुओं के द्वारा नहीं… पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा छुड़ाए गए हो।” — 1 पतरस 1:18–19

निष्कर्ष

पुराने नियम के बलिदान छाया थे।

मसीह उस छाया की वास्तविकता हैं।

  1. अब्राहम और इसहाक: परमेश्वर स्वयं बलिदान का प्रबंध करेगा”:-

उत्पत्ति 22 में परमेश्वर के प्रबंध की एक अद्भुत तस्वीर दिखाई देती है।

इसहाक ने पूछा:- “देख, आग और लकड़ी तो हैं, पर होमबलि के लिये भेड़ कहाँ है?” — उत्पत्ति 22:7

अब्राहम ने उत्तर दिया:- “हे मेरे पुत्र, परमेश्वर होमबलि के लिये भेड़ का उपाय आप ही करेगा।” — उत्पत्ति 22:8

फिर अब्राहम ने उस स्थान का नाम रखा:- “यहोवा यिरे।” — यहोवा प्रबंध करेगा।
— उत्पत्ति 22:14

नए नियम में परमेश्वर के अंतिम प्रबंध के रूप में यीशु मसीह को देखा जाता है।

यूहन्ना 3:16 कहता है:- “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।”

परमेश्वर ने केवल एक पशु का प्रबंध नहीं किया; अंततः उसने अपना पुत्र दिया।

  1. फसह का मेम्ना मसीह की ओर संकेत करता है

इस्राएलियों को एक मेम्ना लेने की आज्ञा दी गई:- “तुम्हारा मेम्ना निर्दोष हो।” — निर्गमन 12:5

उसके लोहू को द्वार की चौखट पर लगाया जाना था।

परमेश्वर ने कहा:- “जब मैं उस लोहू को देखूंगा, तब तुम्हें छोड़ता जाऊँगा।” — निर्गमन 12:13

लोहू न्याय से बचाव का चिन्ह था।

पौलुस स्पष्ट रूप से मसीह को फसह से जोड़ता है:

“क्योंकि हमारा भी फसह जो मसीह है, बलिदान हुआ है।” — 1 कुरिन्थियों 5:7

तस्वीर

पुराना नियम:- फसह का मेम्ना → लोहू → न्याय से छुटकारा।

नया नियम:-  मसीह → उनका लोहू → पाप और न्याय से छुटकारा।

  1. पीतल का साँप मसीह की ओर संकेत करता है”:-

गिनती 21 में इस्राएल के विद्रोह के कारण न्याय आया।

परमेश्वर ने मूसा से कहा:- “जो कोई डसा हुआ है, वह उसको देख ले, तो जीवित रहेगा।” — गिनती 21:8

यीशु ने स्वयं इस घटना को अपने साथ जोड़ा:- “और जिस रीति से मूसा ने जंगल में साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊँचे पर चढ़ाया जाए।” — यूहन्ना 3:14

फिर: “ताकि जो कोई विश्वास करे उसमें अनन्त जीवन पाए।” — यूहन्ना 3:15

और अगले ही पद में:

“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।”
— यूहन्ना 3:16

यीशु ने स्वयं पुराने नियम की इस घटना को अपनी मृत्यु और उद्धार के साथ जोड़ा।

  1. प्रायश्चित का दिन मसीह की ओर संकेत करता है:-

लैव्यव्यवस्था 16 में प्रायश्चित के दिन का वर्णन है।

महायाजक परमपवित्र स्थान में जाता था और इस्राएल के पापों के लिए प्रायश्चित करता था।

लैव्यव्यवस्था कहती है: “क्योंकि इसी दिन तुम्हारे लिये प्रायश्चित किया जाएगा कि तुम्हें शुद्ध करे; तुम अपने सब पापों से यहोवा के सम्मुख शुद्ध ठहरोगे।” — लैव्यव्यवस्था 16:30

लेकिन यह व्यवस्था बार-बार दोहरानी पड़ती थी।

इब्रानियों बताता है कि मसीह ने इससे कहीं महान कार्य किया: –“पर मसीह… महायाजक होकर… बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्रस्थान में प्रवेश किया और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया।”
— इब्रानियों 9:11–12

और:

“अब युग के अन्त में एक ही बार प्रकट हुआ है ताकि अपने बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।” — इब्रानियों 9:26

पुराना नियम

बार-बार बलिदान।

यीशु मसीह

एक पूर्ण बलिदान—सदा के लिए।

  1. यशायाह 53 — दुख उठाने वाला उद्धारकर्ता:-

यशायाह 53 पुराने नियम में आने वाले उद्धारकर्ता की सबसे स्पष्ट तस्वीरों में से एक है।

यशायाह कहता है:- “वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया।” — यशायाह 53:5

फिर:- “यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।” — यशायाह 53:6

और:- “वह सताया गया, तौभी सहता रहा और अपना मुँह न खोला; जैसे भेड़ वध होने के लिये ले जाया जाए।” — यशायाह 53:7

और:- “उसने बहुतों के पाप का बोझ उठा लिया।” — यशायाह 53:12

नए नियम में पूर्ति

पतरस कहता है:

“वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया।”
— 1 पतरस 2:24

प्रेरितों के काम 8 में कूशी अधिकारी यशायाह 53 पढ़ रहा था।

तब फिलिप्पुस ने:- “उसी शास्त्र से आरम्भ करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया।” — प्रेरितों के काम 8:35

अर्थात् प्रारंभिक कलीसिया ने यशायाह 53 को यीशु मसीह के बलिदान के संदर्भ में समझा।

  1. कुँवारी से जन्म लेने वाला उद्धारकर्ता:-

यशायाह ने भविष्यवाणी की:- “देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी।” — यशायाह 7:14

मत्ती इस भविष्यवाणी को यीशु पर लागू करता है:- “देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है—“परमेश्वर हमारे साथ।” — मत्ती 1:23

इसलिए उद्धारकर्ता केवल साधारण मनुष्य नहीं है।

वह है:- “इम्मानुएल”—परमेश्वर हमारे साथ।

  1. उद्धारकर्ता का जन्म बैतलहम में होना था:-

मीका ने भविष्यवाणी की:- “हे बैतलहम एप्राता… तुझ में से मेरे लिये एक पुरुष निकलेगा जो इस्राएल में प्रभुता करनेवाला होगा।”— मीका 5:2

मत्ती यीशु के जन्म को इस भविष्यवाणी से जोड़ता है:- “और हे बैतलहम… तुझ में से एक शासक आएगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की चरवाही करेगा।” — मत्ती 2:6

  1. मसीहा दाऊद का पुत्र होगा:-

परमेश्वर ने दाऊद से प्रतिज्ञा की:- “मैं तेरे पीछे तेरे वंश को खड़ा करूंगा… और मैं उसके राज्य की गद्दी को सदा के लिये स्थिर करूंगा।” — 2 शमूएल 7:12–13

नया नियम यीशु को दाऊद का पुत्र कहता है:- “यीशु मसीह की वंशावली, जो दाऊद का पुत्र…” — मत्ती 1:1

पौलुस कहता है:- “जो शरीर के भाव से तो दाऊद के वंश से उत्पन्न हुआ।” — रोमियों 1:3

इस प्रकार यीशु दाऊद से की गई परमेश्वर की प्रतिज्ञा को पूरा करते हैं।

  1. मसीहा का राज्य अनन्त होगा:-

दानिय्येल ने दर्शन में देखा: – “मानो मनुष्य के सन्तान सा कोई आकाश के बादलों के साथ आया।” — दानिय्येल 7:13

और:- “उसका प्रभुत्व सदा का प्रभुत्व है जो न टलेगा।” — दानिय्येल 7:14

यीशु ने स्वयं को बार-बार “मनुष्य का पुत्र” कहा।

उदाहरण:- “परन्तु इसलिये कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है…” — मरकुस 2:10

इस प्रकार यीशु दानिय्येल के प्रतिज्ञात राजा से जुड़े हुए हैं।

  1. भजन 22 मसीह के दुःख और क्रूस की ओर संकेत करता है:-

भजन 22 में पीड़ित धर्मी व्यक्ति के विषय में लिखा है:“उन्होंने मेरे हाथ और मेरे पाँव बेध डाले।” — भजन 22:16

और:- “वे मेरे वस्त्र आपस में बाँटते हैं, और मेरे कपड़े पर चिट्ठी डालते हैं।” — भजन 22:18

सुसमाचार में सैनिकों द्वारा यीशु के वस्त्र बाँटने और चिट्ठी डालने का वर्णन है:- “और उन्होंने उसके वस्त्र बाँटकर उन पर चिट्ठी डाली कि किसको क्या मिले।” — मरकुस 15:24

इस प्रकार यीशु की क्रूस की मृत्यु पुराने नियम की भविष्यवाणी के अनुरूप है।

  1. पुनरुत्थान की भी भविष्यवाणी की गई:-

दाऊद कहता है:- “क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र जन को सड़ने देगा।” — भजन 16:10

पतरस ने प्रेरितों के काम 2 में इस पद को यीशु के पुनरुत्थान से जोड़ा:- “उसने भविष्य की यह बात कहकर मसीह के जी उठने के विषय में पहले से कहा।”— प्रेरितों के काम 2:31

पौलुस ने भी प्रेरितों के काम 13:35–37 में इसी भविष्यवाणी को मसीह के पुनरुत्थान से जोड़ा।

इसलिए मसीहा मृत्यु की शक्ति में सदा नहीं रहेगा।

  1. पुराना नियम स्वयं कहता है कि परमेश्वर ही एकमात्र उद्धारकर्ता है:-

यह इस पूरे विषय की सबसे महत्वपूर्ण नींवों में से एक है।

परमेश्वर यशायाह के द्वारा कहता है:- “मैं ही यहोवा हूँ और मेरे सिवा कोई उद्धारकर्ता नहीं।” — यशायाह 43:11

फिर:- “क्योंकि मैं ही परमेश्वर हूँ और दूसरा कोई नहीं।”— यशायाह 45:22

और:- “मेरे सिवा कोई परमेश्वर नहीं… मैं ही धर्मी और उद्धार करनेवाला ईश्वर हूँ, मुझे छोड़ दूसरा कोई नहीं।” — यशायाह 45:21

होशे कहता है:- “मैं तो मिस्र देश से ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ… मुझे छोड़ तू किसी और परमेश्वर को न जानना, क्योंकि मेरे सिवा कोई उद्धारकर्ता नहीं है।” — होशे 13:4

अब नए नियम को देखिए।

यीशु के बारे में कहा गया:- “आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।” — लूका 2:11

और:- “यह सचमुच जगत का उद्धारकर्ता है।” — यूहन्ना 4:42

और:- “हमारे महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह।” — तीतुस 2:13

 

बहुत महत्वपूर्ण तार्किक निष्कर्ष

पुराना नियम:- “मेरे सिवा कोई उद्धारकर्ता नहीं।”

नया नियम:- यीशु मसीह उद्धारकर्ता हैं।

इसलिए यीशु को केवल अनेक उद्धारकर्ताओं में से एक मानना बाइबल की समग्र शिक्षा के अनुरूप नहीं है। नया नियम यीशु को उसी एक परमेश्वर की उद्धारकारी पहचान में प्रस्तुत करता है।

  1. यीशु ही “मैं हूँ”:-

पुराने नियम में परमेश्वर ने मूसा से अपना नाम प्रकट किया:- “मैं जो हूँ सो हूँ।” — निर्गमन 3:14

यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु ने कहा:- “अब्राहम के होने से पहले मैं हूँ।” — यूहन्ना 8:58

यीशु ने केवल यह नहीं कहा कि “अब्राहम से पहले मैं था,” बल्कि कहा:“मैं हूँ।”

यह उनके दिव्य अस्तित्व की ओर संकेत करता है।

  1. केवल एक मध्यस्थ है:-

पुराने नियम ने परमेश्वर की पवित्रता और मनुष्य के पाप को प्रकट किया।

नया नियम बताता है कि परमेश्वर और मनुष्य के बीच मध्यस्थ कौन है:- “क्योंकि परमेश्वर एक ही है, और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात् मसीह यीशु जो मनुष्य है।” — 1 तीमुथियुस 2:5

एक मध्यस्थ दो पक्षों के बीच मेल कराता है।

मसीह ने यही कार्य किया।

पौलुस कहता है: –“परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल–मिलाप कर लिया।” — 2 कुरिन्थियों 5:19

और:- “और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल कराकर…” — कुलुस्सियों 1:20

  1. किसी दूसरे में उद्धार नहीं:-

पतरस ने बहुत स्पष्ट रूप से घोषणा की:- “किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।” — प्रेरितों के काम 4:12

ध्यान दीजिए:- “किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं।”

प्रेरितों ने यह नहीं सिखाया कि यीशु अनेक संभावित रास्तों में से एक हैं।

उन्होंने घोषणा की कि यीशु एकमात्र और आवश्यक उद्धारकर्ता हैं।

  1. यीशु स्वयं उद्धार की एकमात्र राह घोषित करते हैं:-

यीशु ने कहा:- “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।” — यूहन्ना 14:6

तीन महत्वपूर्ण घोषणाएँ:

  1. “मार्ग मैं हूँ”

यीशु परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग हैं।

  1. “सत्य मैं हूँ”

यीशु केवल सत्य सिखाने वाले शिक्षक नहीं हैं; वे सत्य का स्वयं प्रकाशन हैं।

  1. “जीवन मैं हूँ”

अनन्त जीवन का स्रोत यीशु मसीह हैं।

और फिर यीशु कहते हैं:

“बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।”

यह मसीह की विशिष्टता का सबसे स्पष्ट कथन है।

  1. यीशु ही क्यों उद्धार कर सकते हैं?:-

बाइबल के अनुसार यीशु में उद्धारकर्ता की सात अनिवार्य योग्यताएँ मिलती हैं:

  1. वे सृष्टिकर्ता हैं

यूहन्ना 1:3; कुलुस्सियों 1:16

  1. वे वास्तव में मनुष्य बने

यूहन्ना 1:14; फिलिप्पियों 2:6–8

  1. वे निष्पाप हैं

इब्रानियों 4:15; 1 पतरस 2:22

  1. उन्होंने पापियों के स्थान पर मृत्यु सहन की

यशायाह 53:5–6; 2 कुरिन्थियों 5:21; 1 पतरस 3:18

  1. वे मृतकों में से जी उठे

भजन 16:10; प्रेरितों के काम 2:31; 1 कुरिन्थियों 15:3–4

  1. वे एकमात्र मध्यस्थ हैं

1 तीमुथियुस 2:5

  1. उद्धार के लिए वही एक नाम दिया गया है

प्रेरितों के काम 4:12

  1. पूरी बाइबल का तार्किक क्रम

अब पूरे तर्क को इस प्रकार समझा जा सकता है:

चरण 1 — सृष्टि

परमेश्वर ने सब कुछ बनाया।

उत्पत्ति 1:1

↓

चरण 2 — मसीह और सृष्टि

सारी वस्तुएँ मसीह के द्वारा सृजी गईं।

यूहन्ना 1:3; कुलुस्सियों 1:16

↓

चरण 3 — पतन

आदम के द्वारा पाप संसार में आया।

उत्पत्ति 3; रोमियों 5:12

↓

चरण 4 — सार्वभौमिक पाप

सभी मनुष्यों ने पाप किया।

रोमियों 3:23

↓

चरण 5 — मृत्यु

पाप का परिणाम मृत्यु है।

उत्पत्ति 2:17; रोमियों 6:23

↓

चरण 6 — उद्धारकर्ता की प्रतिज्ञा

स्त्री का वंश सर्प के सिर को कुचलेगा।

उत्पत्ति 3:15

↓

चरण 7 — बलिदान

प्रायश्चित के लिए बलिदान और रक्त की व्यवस्था दी गई।

लैव्यव्यवस्था 17:11

↓

चरण 8 — फसह

मेम्ने का लोहू न्याय से छुटकारे की ओर संकेत करता है।

निर्गमन 12:13

↓

चरण 9 — प्रतिज्ञात उद्धारकर्ता

दुःख उठाने वाला सेवक हमारे पापों को उठाएगा।

यशायाह 53:5–6

↓

चरण 10 — देहधारण

वचन देहधारी हुआ।

यूहन्ना 1:14

↓

चरण 11 — निष्पाप उद्धारकर्ता

यीशु में कोई पाप नहीं था।

इब्रानियों 4:15

↓

चरण 12 — क्रूस

मसीह हमारे पापों के लिए मरे।

1 कुरिन्थियों 15:3

↓

चरण 13 — पुनरुत्थान

मसीह मृतकों में से जी उठे।

1 कुरिन्थियों 15:4

↓

चरण 14 — एकमात्र मध्यस्थ

एक ही मध्यस्थ है—यीशु मसीह।

1 तीमुथियुस 2:5

↓

चरण 15 — एकमात्र उद्धार

किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं।

प्रेरितों के काम 4:12

↓

अंतिम निष्कर्ष

यीशु मसीह ही मानवजाति के एकमात्र उद्धारकर्ता हैं।

  1. उपदेश के लिए शक्तिशाली निष्कर्ष

बाइबल की कहानी उत्पत्ति में सृष्टि से शुरू होती है और प्रकाशितवाक्य में उद्धार पाए हुए लोगों के परमेश्वर के सामने खड़े होने तक पहुँचती है। उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक एक महान कहानी चलती है—पापियों को यीशु मसीह के द्वारा बचाने की परमेश्वर की योजना।

पुराना नियम उद्धारकर्ता की प्रतिज्ञा करता है।
बलिदान उद्धारकर्ता की तस्वीर देते हैं।
फसह का मेम्ना उद्धारकर्ता की ओर संकेत करता है।
भविष्यद्वक्ता उद्धारकर्ता की घोषणा करते हैं।
सुसमाचार उद्धारकर्ता को प्रकट करते हैं।
क्रूस उद्धार को पूरा करता है।
पुनरुत्थान मसीह की विजय को प्रमाणित करता है।
और प्रेरित घोषणा करते हैं—“किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं।”

इसलिए:

यीशु अनेक उद्धारकर्ताओं में से एक नहीं हैं। वे वही उद्धारकर्ता हैं जिसकी प्रतिज्ञा पूरे पुराने नियम में की गई, जिसकी ओर सारे बलिदान संकेत करते थे, जिसकी भविष्यवाणी भविष्यद्वक्ताओं ने की, और जिसे नए नियम ने प्रकट किया।

एक वाक्य में

सृष्टि मसीह की ओर संकेत करती है, पतन मसीह की आवश्यकता को प्रकट करता है, पुराना नियम मसीह की प्रतिज्ञा करता है, देहधारण मसीह को प्रकट करता है, क्रूस मसीह के द्वारा छुटकारे को पूरा करता है, पुनरुत्थान मसीह की विजय को प्रमाणित करता है, और नया नियम घोषणा करता है—“किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं” (प्रेरितों के काम 4:12)।

 

प्रस्तुतकर्ता:

Ps. Ramesh C. Koundal

Eternal Hope Church of Nazarene, Chandigarh

 

“किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें।” — प्रेरितों के काम 4:12

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